मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा कहाँ जाती है, यह सवाल हर किसी के मन में रहता है। मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है, यह विषय धर्मशास्त्रों में विविधता से वर्णित है। चलिए, हम मृत्यु के बाद के रहस्य को समझें।
आत्मा का रहस्य धर्मशास्त्रों में विवेचित है, और धार्मिक विचारधारा को मानने वाले लोगों के लिए यह एक सत्य माना जाता है। ऋषि-महर्षियों ने अपने तपस्या और ज्ञान के द्वारा ब्रह्मांड की अद्भुतता को समझा और धर्मशास्त्रों का उपदेश दिया है।
मृत्यु के बाद आत्मा का स्थान और आगे की दुनिया का रहस्य आधुनिक विज्ञान के लिए अभी तक अज्ञात है। शास्त्रों के अनुसार, एक बार शरीर को छोड़ने के बाद उसमें वापस जाना संभव नहीं है। इसलिए, धर्मशास्त्र ही आत्मा के संबंध में एकमात्र प्रमाण है।
आत्मा का परकाया-प्रवेश सर्वविदित है। मानव जन्म लेते हैं तो शरीर के साथ आत्मा भी आती है, लेकिन मरते समय शरीर को त्यागते हैं और आत्मा को नहीं। मानव शरीर अनित्य होता है, जिसे एक दिन त्यागना ही पड़ता है। कोई भी व्यक्ति चाहे सौ वर्ष या उससे अधिक जी ले, लेकिन अंत में उसे शरीर छोड़कर परमात्मा की शरण में जाना ही होता है।
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जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म एक निरंतर प्रक्रिया है, जैसे कि पुराने वस्त्र को त्याग कर नए वस्त्र पहनना। जो आत्मा इस सत्य को समझ लेती है, वह मृत्यु के रहस्य को भी समझ जाती है। जीवन, मृत्यु का भय को समझने का एक साधन है, क्योंकि मृत्यु सिर्फ एक परिक्रमा है, जिसका आरंभ जन्म से होता है और वहीं समाप्त भी होता है।
धर्मग्रंथों में आत्मा के संबंध में विस्तृत विवेचन है, और उनके अनुसार, कर्मों के अनुसार ही आत्मा को अगले जन्म में जन्म मिलता है। अच्छे कर्म करने वाले को दुख नहीं होता, जबकि बुरे कर्म करने वाले को दुख झेलना पड़ता है। आत्मा अनंत है और उसका कोई अंत नहीं होता, वह सिर्फ शरीर के रूप में विकसित होती है।


